एक बार धरती माता बहुत दुखी हुई। कंस जैसे बहुत से असुरो ने धरती माँ को बहुत परेशान किया। धरती पर पाप बढ़ गया। पृथ्वी ने गऊ का रूप बनाया और आँखों में आंसू लिए ब्रह्मा के पास गई और कहा बेटा,ब्रह्मा मेरे ऊपर पाप बहुत बढ़ गया है।। और मैं पाप से दबी जा रही हूँ। ब्रह्मा जी बहुत दुखी हुए और भगवन विष्णु के पास क्षीर-सागर गए। ब्रह्मा जी के साथ सारे देवता और भगवान शिव भी थे। भगवान विष्णु कि सबने स्तुति की।। भगवान कि आकाशवाणी सुनाई दी। ब्रह्मा बोले कि देवताओ मुझे भगवान कि आज्ञा हुई है।। कि मैं जल्दी ही धरती पर देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप मैं जन्म लूंगा और मेरा साथ श्री बलराम जी और राधा जी भी अवतार लेंगे। और तुम अपने अपने अंशो से जाकर यादव कुल में अवतार धारण करो। सब देवताओ ने भूरि-भूरि प्रशंसा कि है।।
एक दिन यशोदा अपने कान्हा को नन्द भवन में दूध पिला रही थी। माँ अपने लाला का मुख देख रही है। और बहुत प्यार कर रही है।। भगवान ने देखा की आकाश में तृणावर्त नाम असुर चक्कर लगा रहा था। ये आंधी के रूप में आया था।। भगवान ने जब देखा तो भगवान समझ गए ये मुझे माँ की गोदी से आकाश में ले जायेगा। यदि मैं माँ की गोदी में लेटा रहा तो कहीं माँ को भी ये साथ ना ले जाये आकाश में।। मैं माँ को सम्भालुंगा या खुद को भगवान ने अपने वजन को बढ़ाना शुरू कर दिए। इतना वजन बढ़ा लिए की माँ से गोदी में रखा ही नहीं गया। माँ सोचने लगी की मेरो लाला फूल से हलको है।। लेकिन आज क्या हो गया की मैं इसे उठा भी नही पा रही हूँ। माँ ने झट भगवान को उठाकर पृथ्वी पर लिटा दिया।। उसी समय तेज आंधी चली और चारों ओर अन्धकार ही अन्धकार छा गया। तुरंत तृणावर्त ने भगवान को अपनी गोद में लिया ओर आकाश में उड़ गया । भगवान तृणावर्त के साथ युद्ध करने लगे। अंत में भगवान ने अपने कर कमलो से तृणावर्त का कंठ पकड़ा ओर दबा दिया। इस तरह भगवान ने तृणावर्त का उद्धार कर दिये।।
एक दिन यशोदा अपने कान्हा को नन्द भवन में दूध पिला रही थी। माँ अपने लाला का मुख देख रही है। और बहुत प्यार कर रही है।। भगवान ने देखा की आकाश में तृणावर्त नाम असुर चक्कर लगा रहा था। ये आंधी के रूप में आया था।। भगवान ने जब देखा तो भगवान समझ गए ये मुझे माँ की गोदी से आकाश में ले जायेगा। यदि मैं माँ की गोदी में लेटा रहा तो कहीं माँ को भी ये साथ ना ले जाये आकाश में।। मैं माँ को सम्भालुंगा या खुद को भगवान ने अपने वजन को बढ़ाना शुरू कर दिए। इतना वजन बढ़ा लिए की माँ से गोदी में रखा ही नहीं गया। माँ सोचने लगी की मेरो लाला फूल से हलको है।। लेकिन आज क्या हो गया की मैं इसे उठा भी नही पा रही हूँ। माँ ने झट भगवान को उठाकर पृथ्वी पर लिटा दिया।। उसी समय तेज आंधी चली और चारों ओर अन्धकार ही अन्धकार छा गया। तुरंत तृणावर्त ने भगवान को अपनी गोद में लिया ओर आकाश में उड़ गया । भगवान तृणावर्त के साथ युद्ध करने लगे। अंत में भगवान ने अपने कर कमलो से तृणावर्त का कंठ पकड़ा ओर दबा दिया। इस तरह भगवान ने तृणावर्त का उद्धार कर दिये।।

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